मिट्टी से पौधे पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम खींच लेते हैं। यदि इन्हें वापस न लौटाया जाए, तो मिट्टी बंजर हो सकती है। खाद और उर्वरक का उपयोग करके इन पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में डाला जाता है। जैविक खाद (जैसे गोबर, हरी खाद) और रासायनिक उर्वरक (जैसे यूरिया, डीएपी) इसका समाधान हैं।
हाइड्रोपोनिक्स कृषि की एक ऐसी उच्चतम तकनीक है जिसमें पौधों को उगाने के लिए जल का उपयोग किया जाता है, तथा पौधों के लिए आवश्यक तत्वों को जल में घुले हुए खनिज और ऑक्सीजन द्वारा पूरा किया जाता है जो पौधों को बढ़ाने के लिए और उचित पोषण तत्वों को पूरा करने के लिए जरूरी होते हैं
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के किसानों को अत्यधिक मौसमी परिस्थितियों जैसे सूखा, बाढ़, लवणता, और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु-सहिष्णु फसलें (Climate-Resilient Crops) एक महत्वपूर्ण समाधान हैं। यह लेख आपको इन फसलों के बारे में पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रदान करेगा।
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के किसानों को अत्यधिक मौसमी परिस्थितियों जैसे सूखा, बाढ़, लवणता, और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु-सहिष्णु फसलें (Climate-Resilient Crops) एक महत्वपूर्ण समाधान हैं। यह लेख आपको इन फसलों के बारे में पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रदान करेगा।
मिट्टी से पौधे पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम खींच लेते हैं। यदि इन्हें वापस न लौटाया जाए, तो मिट्टी बंजर हो सकती है। खाद और उर्वरक का उपयोग करके इन पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में डाला जाता है। जैविक खाद (जैसे गोबर, हरी खाद) और रासायनिक उर्वरक (जैसे यूरिया, डीएपी) इसका समाधान हैं।
जेनेटिक मैनीपुलेशन या जैविक हेरफेर (जेनेटिक इंजीनियरिंग) एक उन्नत तकनीक है, जिसमें किसी जीव के जीन में बदलाव करके वांछित गुण जोड़े जाते हैं। कृषि क्षेत्र में इसका उपयोग पौधों की पैदावार बढ़ाने, पोषण मूल्य सुधारने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से किसान न केवल अधिक उत्पादन कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना भी कर सकते हैं।
सौर ऊर्जा आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को सस्ती, स्थायी, और हरित ऊर्जा प्रदान करना है। यह योजना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की ऊर्जा नीति में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
भारत में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर अत्यधिक निर्भरता ने सरकार को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता महसूस कराई। इसके तहत, दो प्रमुख मिशन - राष्ट्रीय मिशन ऑन एडीबल ऑइल्स - ऑयल पाम (NMEO-OP) और राष्ट्रीय तिलहन और खाद्य तेल मिशन (NMEO-Oilseeds) की शुरुआत की गई। इन मिशनों का उद्देश्य न केवल खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि भारत को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही किसानों की आय में भी सुधार लाना है।
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के किसानों को अत्यधिक मौसमी परिस्थितियों जैसे सूखा, बाढ़, लवणता, और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु-सहिष्णु फसलें (Climate-Resilient Crops) एक महत्वपूर्ण समाधान हैं। यह लेख आपको इन फसलों के बारे में पूरी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रदान करेगा।